न जाने क्यू ये दिल आप का हो गया

मुलाकात तो हमारी आज तक नहीं हुई आप से​
फिर भी न जाने क्यू ये दिल आप का हो गया


Comments

Popular posts from this blog

शीश कलम करवा लूँगा पर, कलमा नही पढूंगा मैं|

पत्थरों के शहर में कच्चे मकान कौन रखता है...!

मैं ही "ईश्वर" हूँ..